- ‘गुल्ली-डंडा’ सामासिक पद का विग्रह करके भेद भी लिखिए ।
- ‘आत्मविश्वास’ पद समास के किस भेद का उदाहरण है ?
- ‘प्रत्येक’ पद समास के किस भेद का उदाहरण है और क्यों ?
- ‘तीन भुजाओं का समाहार’ विग्रह का समस्त पद बनाकर भेद लिखिए ।
- बहुव्रीहि समास का एक उदाहरण लिखिए ।
- ‘बेकाम’ सामासिक पद का विग्रह करके भेद भी लिखिए ।
- ‘नवनिधि’ समस्त पद किस समास का उदाहरण है और कैसे ?
- द्वंद्व समास का एक उदाहरण दीजिए ।
- ‘कांति से हीन’ विग्रह का समस्त पद बनाकर भेद का नाम भी लिखिए ।
- तताँरा ध्यान में मग्न होकर वामीरो का गाना सुन रहा था। इस वाक्य में रेखांकित पदों की जगह उपयुक्त समस्त पद लिखिए ।
- ‘शब्दहीन’ सामासिक पद का विग्रह कीजिए और भेद भी लिखिए ।
- ‘अव्ययीभाव’ समास का एक उदाहरण दीजिए ।
- ‘सप्तसिंधु’ किस समास का उदाहरण है और कैसे ?
- ‘महान है आत्मा जिसकी’ विग्रह का समस्त पद बनाकर भेद का नाम लिखिए ।
- ‘विद्या रूपी धन के सामने सभी धन तुच्छ हैं ।’ निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित पदों की जगह उपयुक्त समस्त पद लिखिए ।
- ‘जीवन भर’ का समस्तपद बनाकर समास का नाम लिखिए।
- ‘षड़ानन’ समस्तपद का विग्रह करते हुए समास के भेद का नाम लिखिए।
- ‘कर्मधारय समास’ में कौन-सा पद प्रधान होता है ?
- ‘पाँच तत्त्वों का समाहार’ समस्तपद लिखकर समास का नाम लिखिए।
- ‘हर माह’ का समस्तपद बनाकर समास का भेद लिखिए।
- ‘वीणापाणि’ समस्तपद का विग्रह कीजिए और समास का भेद लिखिए।
- ‘तत्पुरुष समास’ का कौन-सा पद प्रधान होता है ?
- ‘महोदधि’ समस्तपद का विग्रह करके समास का नाम लिखिए ।
- ‘कर्म में रत (लीन)’ समस्तपद लिखकर समास का भेद लिखिए।
ANSWER
- गुल्ली और डंडा – द्वंद्व समास
- तत्पुरुष समास
- अव्ययीभाव समास, प्रथम पद ‘प्रति’ अव्यय
- त्रिभुज – द्विगु समास
- दशानन, गजानन
- बिना काम के – अव्ययीभाव समास
- द्विगु समास, प्रथम पद संख्यावाची
- रात-दिन, माता-पिता (अन्य उपयुक्त उदाहरण भी स्वीकार्य)
- कांतिहीन – तत्पुरुष समास
- ध्यानमग्न
- शब्द से हीन – तत्पुरुष समास
- आमरण, यथाशक्ति
- द्विगु समास, प्रथम पद संख्यावाची
- महात्मा – बहुव्रीहि समास
- विद्याधन
- आजीवन – अव्ययीभाव समास
- षड् (छह) है आनन जिसके अर्थात भगवान कार्तिकेय – बहुव्रीहि समास
- उत्तर पद – कर्मधारय समास नीला है जो गगन या नीलगगन कर्मधारय समास
- पंचतत्त्व – द्विगु समास
- प्रतिमाह – अव्ययीभाव समास
- वीणा है पाणि में जिसके अर्थात माँ सरस्वती बहुव्रीहि समास
- उत्तर पद प्रधान – तत्पुरुष समास
- महान है जो उद्धि – महोदधि कर्मधारय समास
- कर्मरत – तत्पुरूष समास

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