‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’
1. बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा है ? ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर लिखिए।
प्राकृतिक असंतुलन ,प्रदूषण वृद्धि ,वृक्षों की कटाई
पक्षियों का बस्तियों से पलायन
समुद्री जमीन पर बस्तियों का निर्माण
नित नए रोगों का फैलना
2. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ में समुद्र के गुस्से का क्या कारण था ? उसने अपना गुस्सा कैसे शांत किया?
उत्तर-मानव द्वारा समुद्री ज़मीन को हथियाना, निरंतर नई इमारतें बनाना और समुद्र का सिमटना। तीन समुद्री जहाजों को तीन विपरीत दिशाओं में फेंककर समुद्र ने अपना गुस्सा शांत किया।
3. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख में दुखी होने वाले‘ पाठ के अनुसार वनस्पति और जीव-जगत के बारे में लेखक की माँ के क्या विचार थे ?
दरिया पर जाओ तो उसे सलाम करो।
कबूतरों को मत सताया करो, ये हज़रत मुहम्मद के अज़ीज़ हैं।
मुर्गे को परेशान नहीं किया करो, वह मुल्लाजी से पहले मोहल्ले को जगाता है।
4. शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए ? इससे उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है ? ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर- अपने बाजू पर रेंगते हुए काले-च्योंटे को वापस उसके घर (कुएँ पर) छोड़ने के लिए उठ खड़े हुए। इस घटना से उनके जीवों के प्रति प्रेम व दया के भाव की विशेषता पता चलती है।
5. ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बढ़ती हुई आबादी का पशु पक्षियों और मनुष्यों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है? इसका समाधान क्या हो सकता है?
प्रभाव •
जीव-जंतुओं का आश्रय छिन जाना
विभिन्न प्रजातियों का लुप्त होना ।
मनुष्य का डिब्बे जैसे घरों में बँधकर रह जाना प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की अंधी दौड़, लालच बढ़ना
प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति पैदा होना
बढ़ते प्रदूषण के कारण नित नए रोगों से ग्रस्त होना संवेदनहीनता व स्वार्थपरता में वृद्धि होना।
6. ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक की माँ द्वारा उन्हें समय-समय पर क्या निर्देश दिए जाते थे ? उन निर्देशों के माध्यम से पाठकों को क्या सीख दी गई है?
निर्देश –
दीया-बाती के वक्त फूलों को मत तोड़ो, फूल बहुआ देते हैं।
दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो, वह खुश होता है।
कबूतरों को मत सताया करो, वे हज़रत मोहम्मद को अज़ीज़ हैं।
मुर्गे को परेशान नहीं किया करो, वह मुल्ला जी से पहले अज़ान देकर सबको जगाता है।
सीख-
प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होना
7. वर्तमान में लगभग सारा विश्व जलवायु परिवर्तन और विविध प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। प्रकृति में आए इन अवांछनीय परिवर्तनों के क्या कारण हैं? ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए ।
लगातार बढ़ती आबादी, बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रकृति का अति दोहन करना
पेड़-पौधों के अत्यधिक कटाव के कारण पशु-पक्षियों का आश्रय छिनना
बारूदों की विनाशलीलाओं से वातावरण का प्रदूषित होना
8. शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए ? ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर लिखिए ।
अपने बाजू पर रेंगते हुए काले चींटे को वापस उसके घर (कुएँ पर) छोड़ने के लिए उठ खड़े हुए।
जीवों के प्रति प्रेम व दया की भावना
9. ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले‘ पाठ में शेख अयाज़ के पिता के किस गुण का उल्लेख है ? क्या वह गुण वर्तमान में प्रासंगिक है? कारण सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए ।
गुण-
जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति।
शेख अयाज़ के पिता जब किसी को तकलीफ़ में देखते थे, तो खुद भी दुखी हो जाते थे। उनके भीतर दूसरों के लिए गहरी संवेदना थी। यह गुण उन्हें एक सच्चा इंसान बनाता है, जो केवल अपने सुख-दुख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के प्रति भी जिम्मेदार महसूस करता है
10. लेखक ने ग्वालियर से मुंबई तक प्रकृति और मनुष्य के संबंधों में किन बदलावों को महसूस किया? ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर -प्रकृति के प्रति सम्मान और संवदेनशीलता में कमी आ गई है।पहले लोग बड़े-बड़े घरों में रहते थे, अब उनका जीवन डिब्बानुमा घरों में सिमटने लगा है। पहले जहाँ घने जंगल थे, वहाँ अब घनी बस्तियाँ बसा दी गई हैं। पशु-पक्षी बेघर हो गए हैं।
11. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले‘ पाठ के आधार पर नूह के मुद्दत तक रोते रहने का कारण स्पष्ट कीजिए। इससे उनके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है?
रोने का कारण –
घायल कुत्ते द्वारा गलती का बोध कराने पर नूह का पश्चाताप करना
चरित्र की विशेषता –
संवेदनशील, दया और करुणा की भावना से ओत-प्रोत
12. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर लिखिए कि ऐसा क्या हुआ कि समुद्र अपने क्रोध पर नियंत्रण खो बैठा और उसका क्या दुष्परिणाम निकला?
- नियंत्रण खोने का कारण –
- बड़े-बड़े बिल्डरों द्वारा समुद्र की जमीन का अतिक्रमण करना
- दुष्परिणाम –
- समुद्र द्वारा अपनी लहरों पर दौड़ने वाले जहाज़ों को तहस-नहस कर देना
13, निदा फाज़ली की माँ के जीव-जंतुओं और प्रकृति के प्रेम और अपनी माँ की सोच में आप क्या समानता पाते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
- उत्तर:
- निदा फ़ाज़ली की माँ जीव-जंतुओं और प्रकृति से गहरा प्रेम करती थीं। वे छोटे-छोटे पक्षियों, जानवरों और पेड़-पौधों को परिवार का ही हिस्सा मानती थीं। उन्हें किसी प्रकार की हानि पहुँचाना उन्हें स्वीकार नहीं था। मेरी माँ की सोच भी ऐसी ही है। वे भी पेड़-पौधों को संतान की तरह सींचती हैं और पक्षियों तथा पशुओं के प्रति करुणा और दया का भाव रखती हैं। दोनों ही माताओं की सोच में करुणा, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव समान रूप से दिखाई देता है।
14, ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के संदर्भ में लिखिए कि बढ़ते हुए प्रदूषण का जीव-जंतुओं पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
- जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण यहाँ-वहाँ डेरा डालना
- अनेक जीव-जंतुओं की प्रजातियाँ लुप्त हो रही हैं या लुप्त होने के कगार पर (जैसे- गौरेया)
15. ‘अब न सोलोमेन है, न मेरी माँ’ इस कथन के माध्यम से क्या कटाक्ष किया गया है ?
- ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर लिखिए।
- जीव-जंतुओं के प्रति दया-सहानुभूति रखने वाले लोगों की संख्या कम
- लोगों का संवेदनहीन होना, पशु-पक्षियों का आशियाना छीनना तथा उन्हें बेघर करना
16.जीव-जंतुओं के प्रति व्यवहार में निदाफाज़ली की माँ और पत्नी के व्यवहार के अंतर ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर लिखिए।
माँ : जीव-जंतुओं के प्रति मन में दया, सहानुभूति, करुणा की भावना, पक्षियों को न सताना, प्रकृति का आदर करना, अंडा टूट जाने पर रोजा रखना
पत्नी : जीव-जंतुओं के प्रति दया और सहानुभूति का कम होना, पक्षियों के आवागमन से होने वाली परेशानी से बचने के लिए जाली लगवाना

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