1.एक शब्द या वाक्यांश या वाक्य में उत्तर लिखिए:
1. रसखान मनुष्य रूप में अलग जन्म कहाँ लेना चाहते हैं?
उत्तरः रसखान मनुष्य रूप में अलग जन्म बृन्दावन में लेना चाहते हैं।
2. रसखान पशु रूप में जन्म लेने पर कहाँ रहना चाहते हैं?
उत्तरः रसखान पशु रूप में जन्म लेने पर नन्दबाबा के गौओं के बीच जन्म लेकर रहना चाहते हैं।
3. रसखान पक्षी रूप में जन्म लेने पर किस डाली पर बसना चाहते हैं?
उत्तरः रसखान पक्षी रूप में जन्म लेने पर कालिंदी नदी के किनारे, कदम की पेड़ की डाली पर बसना चाहते हैं।
4. गोपी सिर पर क्या धारण करना चाहती है?
उत्तरः गोपी सिर पर मोर-मुकुट धारण करना चाहती है।
5. गोपी कृष्ण की मुरली कहाँ नहीं रखना चाहती है?
उत्तरः गोपी कृष्ण की मुरली ओठों पर नहीं रखना चाहती है।
।।. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
1. रसखान ब्रज भूमि में क्यों जन्म लेना चाहते हैं?
उत्तरः रसखान को कृष्ण की क्रीडा-स्थली ब्रज भूमि से बड़ा लगाव है। अतः वे कहते हैं कि यदि मैं अगले जन्म में मनुष्य बनूँ तो गोकुल के ग्वालों के बीच में मेरा जन्म हो। अगर पशु के रुप में जन्म लूँ तो नंदबाबा की गौओं के बीच में जन्म लूँ, अगर मैं पक्षी में जन्म लूँ, तो यमुना के तट स्थित कदम की डाली पर रहूँ। यदि पत्थर बनूँ तो गोवर्धन पर्वत के पत्थर के रूप में जन्म लूँ।
2. गोपी क्या-क्या स्वाँग भरती हैं?
उत्तरः गोपी अपने प्रियतम श्रीकृष्ण को पाने के लिए मोर पंख का मुकुट पहनकर गूंज की माला यानी रत्नों की माला गले में धारण कर पीतांबर ओढ कर हाथ में लकुटिया लेना चाहती है। वह कृष्ण के सभी स्वाँग भर कर गोधन और ग्वालिनों के संग खेलना चाहती है। परंतु मुरलीधर की मुरली अपने अधरों पर नहीं रखना चाहती है।
3. गोपियों का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम कैसा है?
उत्तरः गोपियों का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम है। वे अपने कृष्ण को पाने और रिझाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। परंतु अपनी मर्यादा के साथ रहना चाहती है। गोपियाँ ब्रजभूमि, ब्रज के पशु-पक्षि तथा ब्रज की गौएँ आदि को कृष्णभक्ति में सहायक मानती है।
III संदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए:
1. ‘मानुष हो तो वही रसखानि बसौ ब्रज गोकुल गांव के ग्वारन।
जो पसु हौं, तो कहा बसु मेरो, चरौ नित नन्द की धेनु मँझारन ॥
पाहन हौ, तो वही गिरि कौ, जो धरयौ कर छत्र पुरंदर धारण।
जो खग हो, बसेरों करौं मिलि कालिंदी-कूल कदम की डारंन ॥’
प्रसंगः प्रस्तुत पद को कवि- रसखान द्वारा लिखित ‘रसखान के सवैये’ कविता पाठ से लिया गया है।
संदर्भः प्रस्तुत सवैये को रसखान श्रीकृष्ण से कह रहे हैं।
स्पष्टीकरणः इस सवैये के माध्यम से कृष्ण भक्त कवि रसखान श्रीकृष्ण पर अन्नय भक्ति तथा ब्रज भूमि के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। रसखान अपना संबंध श्रीकृष्ण से जोडना चाहते हैं। जिनका संबंध श्रीकृष्ण से है। रसखान को ब्रज भूमि से इतना लगाव हो गया है कि वे कहते हैं यदि मैं अगले जन्म में मनुष्य बनूँ तो गोकुल के ग्वालों के बीच में मेरा जन्म हो। अगर पशु के रुप में जन्म लूँ तो नंदबाबा की गौओं के बीच में जन्म लूँ, अगर मैं पक्षी में जन्म लूँ, तो यमुना के तट स्थित कदम की डाली पर रहूँ। यदि पत्थर बनूँ तो गोवर्धन पर्वत के पत्थर के रूप में जन्म लूँ।
विशेषताः प्रस्तुत पद में राशिद खान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को बताया है।

Leave a comment