Class 9 Hindi Chapter 1 Notes (Do Bailon Ki Katha)
अभ्यास
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
- कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तरः (ख) एकता और सहयोग
तर्कः दोनों बैल हर परिस्थिति में एक-
दूसरे का साथ देते हैं – चाहे साँड़ से लड़ाई हो, दीवार तोड़ना हो या कॉजीहाउस में रुकना। मोती हीरा को छोड़कर नहीं गया – यही सच्ची एकता है। - हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तरः (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।।। तर्कः झूरी के साले के यहाँ जाने पर उन्हें लगा कि उन्हें बेच दिया गया। अपने घर और मालिक के प्रति उ नका लगाव था, इसलिए उन्होंने नई जगह अपनाने से इनकार किया। - बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
उत्तरः (घ) अपनापन पाने के लिए
तर्कः गया के घर न प्यार था, न ढंग का चारा। झूरी का घर उनका अपना था। अपनेपन की चाहत ने उन्हें वापस खींचा। - गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
उत्तरः (क) स्वाभिमान
तर्कः बिना कारण मार खाना मोती को स्वीकार नहीं था। उसने हल लेकर भागने की कोशिश की। यह स्वाभिमान की भावना है। - कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तरः (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिएतर्कः मूक- - भाषा के माध्यम से लेखक यह दर्शाना चाहते हैं कि पशुओं में भी भावनाएँ, विचार और चेतना होती है -जो कभी-कभी मनुष्यों से भी श्रेष्ठ होती है।
- ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
उत्तरः (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
तर्कः हीरा और मोती का अन्याय सहने के बाद विद्रोह करना, जेल (काँजीहाउस) जाना, और अंततः मु क्ति पाना – ये सब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
1.”दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तरः बैलों ने नए मालिक के यहाँ काम करने से इसलिए इनकार किया क्योंकि पहली बात यह थी कि उन्हें लगा उन्हें बेच दिया गया है, जो उनके लिए अपमानजनक था। दूसरे, गया ने उनके साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार नहीं किया। तीसरे, उनका हृदय झूरी के घर में था वह जगह उनकी अपनी थी। बिना अपनेपन के काम करना उन्हें स्वीकार नहीं था। यह उनके स्वाभिमान और वफादारी का प्रमाण है।
2.”गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई सा धारण घटना नहीं है। कैसे?
उत्तरः बैलों का घर लौटना इसलिए असाधारण था क्योंकि उन्होंने मजबूत पगहे तोड़े, रात में अपरिचित रास्तों से गुजरे, और बिना किसी मार्गदर्शन के अपने घर पहुँचे। यह उनकी स्मृति, बुद्धि और भावना त्मक लगाव का प्रमाण है। झूरी के मन में उनके प्रति प्रेम था और बैलों के मन में झूरी के प्रति। यह पार स्परिक प्रेम और वफादारी की भावना इस घटना को अविस्मरणीय बनाती है।
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा।” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तरः कहानी में संघर्ष की अनिवार्यता कई स्थानों पर दिखती है-
पहला उदाहरणः जब गया ने बिना कारण बैलों को मारा, तो मोती ने हल लेकर भागने की कोशिश की-अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध का पहला संकेत।
दूसरा उदाहरणः साँड़ से मुठभेड़ यदि दोनों मित्र संगठित होकर न लड़ते तो जान से हाथ धो बैठते। संघ र्ष आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य था।
तीसरा उदाहरणः कॉजीहाउस की दीवार तोड़ना स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किए बिना मुक्ति संभव नहीं थी।
4.”जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तरः हीरा और मोती अपनापन की भावना से अधिक प्रेरित थे। जब वे कॉजीहाउस से भागे, तो स्वतंत्रता मिलने के बावजूद वे झूरी के घर की ओर दौड़े किसी अज्ञात जगह नहीं गए। हीरा ने मोती से कहा भी-“नहीं-
नहीं, दौंडकर थान पर चलो। वहाँ से हम आगे न जाएँगे।” यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए ‘अपना घर’ और ‘अपना मालिक ही सर्वोपरि था।
5.”बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”
‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तरः हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। जब हम चुपचाप अत्याचार सहते रहते हैं तो अत्याचारी और अधिक साहसी हो जाता है। बैलों ने भी यही किया काम न करके, दीवार तोड़कर, सॉड़ से लड़कर उन्होंने विरोध जताया। यदि वे सब कुछ चुपचाप सहते रहते, तो उनकी स्थिति कभी नहीं बदलती। इतिहास भी यही सिखाता है कि अन्याय का विरोध न करने वाले समाज कभी प्रगति नहीं करते।
6.”बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तरः निम्नलिखित घटनाएँ उनकी गहरी मित्रता सिद्ध करती हैं-
1.दोनों बैल हमेशा साथ-साथ रहते थे।
वे एक-दूसरे को चाटकर अपना स्नेह प्रकट करते थे और साथ ही खाते-पीते थे। गया के घर से भागते समय 2.दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।
कठिन परिस्थिति में भी वे साथ-साथ अपने पुराने मालिक झूरी के घर लौट आए।
3.सांड से लड़ते समय दोनों ने मिलकर मुकाबला किया।
अकेले लड़ने के बजाय उन्होंने एक-दूसरे का सहयोग किया और सांड को परास्त कर दिया।
4. मुश्किल समय में दोनों एक-दूसरे की चिंता करते थे।
जब किसी एक को कष्ट होता, तो दूसरा भी दुखी हो जाता था।
5.कांजीहाउस में भी दोनों साथ रहे।
भूखे-प्यासे होने पर भी उन्होंने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और मिलकर भागने का प्रयास किया।
7.7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
कहानी ‘दो बैलों की कथा’ में मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
| मालकिन का व्यवहार | छोटी लड़की का व्यवहार |
|---|---|
| मालकिन हीरा और मोती के साथ कठोर और निर्दयी व्यवहार करती थी। | छोटी लड़की बैलों के प्रति दयालु और सहानुभूतिपूर्ण थी। |
| वह उन्हें पर्याप्त चारा नहीं देती थी और उनके कष्टों की परवाह नहीं करती थी। | वह चोरी-छिपे उन्हें रोटियाँ खिलाती थी। |
| बैलों को मारने-पीटने और उनसे अधिक काम लेने का समर्थन करती थी। | वह बैलों का दुख समझती थी और उनकी सहायता करना चाहती थी। |
| उसके व्यवहार में प्रेम और करुणा का अभाव था। | उसके व्यवहार में प्रेम, दया और संवेदनशीलता थी। |
मेरी कल्पना मेरे अनुमान
- “उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप उस छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तरः यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो मैं न केवल उन्हें रोटियाँ खिलाता/खिलाती, बल्कि गाँव के लोगों को उनके साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी देता/देती। मैं किसी बुजुर्ग या पंचायत से न्याय दिलाने की माँग करता/करती। मैं चाहता/चाहती कि बैल झूरी के पास वापस पहुँचे, इसलिए झूरी को पत्र या संदेश भी भेजता/भेजती। - “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तरः हाँ, बिल्कुल सहमत हूँ। जब कॉजीहाउस की दीवार टूटी, तो घोड़े, बकरियों और भैंसें भाग गई, पर गधे डर के मारे खड़े रहे। उनमें साहस की कमी थी। वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है कई बार हमें अवसर मिलते हैं, परंतु असफलता का भय और “क्या सोचेंगे लोग” का संकोच हमें जकड़े रखता है। इसलिए निर्णायक क्षणों में साहस और दृढ़ता ज़रूरी है।
मेरे अनुभव मेरे विचार - “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी… ” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तरः हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। जब दोस्ती सच्ची और गहरी होती है, तो औपचारिकता खत्म हो जाती है। हम अपने घनिष्ठ मित्रों के साथ बिना सोचे-समझे मजाककरते हैं, उन्हें छेड़ते हैं- यही घनिष्ठता की पहचान है। मेरे जीवन में भी मेरे सबसे अच्छे मित्र के साथ यही होता है हम एक-दूसरे को चिढ़ाते भी हैं और ज़रूरत में साथ भी देते हैं। - “हीरा ने तिरस्कार किया गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है…” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तरः मैं हीरा के विचारों के साथ हूँ। गिरे हुए शत्रु पर वार करना कायरता है, वीरता नहीं। यह भारतीय संस्कृति के मूल्यों के भी विरुद्ध है। जो शत्रु पराजित हो गया हो, उस पर आक्रमण करना क्रूरता है। साथ ही, अनावश्यक हिंसा से खुद की छवि भी खराब होती है। हीरा का संयम और नैतिकता उसे महान बनाते हैं। - “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तरः हाँ, मैंने एक बार अपने मित्र के साथ मिलकर एक कठिन परिस्थिति का सामना किया था। मेरे मित्र की तबीयत परीक्षा के समय खराब हो गई थी। वह बहुत परेशान था क्योंकि वह पढ़ाई नहीं कर पा रहा था। तब मैंने उसकी मदद करने का निश्चय किया। मैं रोज़ उसके घर जाता था और उसे पढ़ाई समझाता था। हम दोनों मिलकर धीरे-धीरे तैयारी करते रहे। आखिरकार, उसने परीक्षा दी और अच्छे अंक भी प्राप्त किए। इस अनुभव से मुझे समझ आया कि सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय में साथ दे।
विधा से संवाद
कहानी की पड़ताल
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी
एक भाव को पुष्ट करते हैं। कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।
आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
उत्तरः
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शीर्षक और लेखक | दो बैलों की कथा – मुंशी प्रेमचंद |
| विषय | पशु-प्रेम, मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता की भावना तथा मानवीय संवेदनाएँ |
| क्रिया/कार्य | हीरा और मोती नामक दो बैलों को उनके मालिक झूरी का साला गया अपने घर ले जाता है। वहाँ उन्हें कष्ट सहने पड़ते हैं। वे अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए अंततः अपने मालिक झूरी के पास लौट आते हैं। |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | ग्रामीण परिवेश। कहानी भारतीय गाँव के सामाजिक जीवन को दर्शाती है। मुख्य विचार यह है कि पशुओं में भी प्रेम, मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना होती है तथा उनके साथ दयापूर्ण व्यवहार करना चाहिए। |
| चरित्र/पात्र | हीरा, मोती, झूरी, झूरी की पत्नी, गया, छोटी लड़की, कांजीहाउस के कर्मचारी आदि। |
| परिणाम | अनेक कष्ट झेलने के बाद हीरा और मोती अपने सच्चे मालिक झूरी के घर लौट आते हैं। उनका प्रेम, मित्रता और स्वाभिमान विजयी होता है तथा उन्हें फिर से स्नेह और सम्मान प्राप्त होता है। |
कहानी का सौंदर्य
“दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछ खड़ी हो गई।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं। नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
| विशेषता | विशेषता का अर्थ | उदाहरण 1 | उदाहरण 2 |
|---|---|---|---|
| चित्रात्मक भाषा | शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना | “घुटने तक पाँव कीचड़ से सने थे।” | “सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।” |
| संवादात्मकता | कथा को आगे बढ़ाने के लिए पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने हेतु बातचीत और संवादों का प्रयोग | “मर जाऊँगा, पर उसके काम न आऊँगा।” | “भागना कायरता नहीं, यह स्वाधीनता है।” |
| विरोधाभास | एक ही प्रसंग में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ उपस्थित होना | “झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया, पर उसकी पत्नी ने उन्हें डाँटा।” | “स्वतंत्रता की चाह थी, पर बंधन में रहना पड़ रहा था।” |
| व्यंग्य | हास्य या कटाक्ष के माध्यम से किसी दोष, कुरीति या अन्याय को प्रकट करना | “भारतीयों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है?” | “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देते, तो शायद सभ्य कहलाते।” |
| संघर्ष | दो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना | “उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नज़र आती।” | “मोती और हीरा का अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष।” |
| अतिशयोक्ति | किसी पात्र, घटना या भाव का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे | “झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था।” | “दोनों उड़ने लगते थे, मानो पंख लग गए हों।” |
| संदेह / उलझन | जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता और असमंजस की स्थिति में होता है | “सारा दिन बीत गया, खाने को एक तिनका भी न मिला, समझ में न आता था कि यह कैसा स्वामी है?” | “अब क्या करें— भागें या सहें?” |
कहानी की रचना
प्रायः कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तरः प्रारंभिक संकेत गधे की तुलना, बैलों का भाईचारा, झूरी का स्नेह, –
मूक-भाषा- ये सब मुख्य भाव (वफादारी संघर्ष) पहले ही दिखाते हैं।
विषयों से संवाद
कहानी का समय और समाज
‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतीय भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे। इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
|---|---|
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विरोध भरा हुआ था। | भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर टपके। | ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं, मैं बेचूँगा, तो बेचूँगा।
किसी को मेरे बैल नीलाम
करने का क्या अधिकार है!”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”
1. बैलों का कांजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर:
बैलों का कांजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों पक्षों को दर्शाता है। न्याय इसलिए कि आवारा या भटके हुए पशुओं को पकड़कर कांजीहाउस में रखना एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिससे खेतों और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा हो सके तथा पशुओं के वास्तविक मालिकों का पता लगाया जा सके। दूसरी ओर, अन्याय इसलिए है कि कांजीहाउस में बैलों को पर्याप्त चारा-पानी नहीं दिया जाता था और उनकी उचित देखभाल भी नहीं होती थी। वे भूख-प्यास और कष्ट झेलने के लिए मजबूर थे। इसलिए व्यवस्था का उद्देश्य तो उचित था, लेकिन पशुओं के साथ किया गया व्यवहार अन्यायपूर्ण था।
2. यदि अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे अवसर मिले तो मैं बैलों तथा अन्य पशुओं के लिए निम्नलिखित कानूनी अधिकारों की माँग करूँगा—
- पशुओं को पर्याप्त एवं पौष्टिक चारा-पानी उपलब्ध कराने का अधिकार।
- पशुओं को मारपीट, अत्याचार और किसी भी प्रकार की क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार।
- बीमार या घायल पशुओं के लिए उचित चिकित्सा सुविधा का अधिकार।
- पशुओं को अनावश्यक श्रम कराने तथा शोषण से बचाने का अधिकार।
- बिना उचित कारण पशुओं को बेचने, त्यागने या प्रताड़ित करने पर कानूनी रोक।
- कांजीहाउस एवं पशु आश्रय स्थलों में मानवीय व्यवहार और उचित देखभाल की व्यवस्था।
- पशु क्रूरता निवारण कानून का सख्ती से पालन तथा उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान।
3. हीरा-मोती थानाध्यक्ष को शिकायत पत्र लिखते हैं।
सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
_________ थाना,
_________।
विषय : पशुओं के साथ हो रहे अत्याचार के संबंध में शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम दोनों बैल, हीरा और मोती, आपके क्षेत्र के निवासी हैं। हमारे साथ लगातार अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। हमें पर्याप्त चारा-पानी नहीं दिया जाता तथा हमसे अत्यधिक काम लिया जाता है। कई बार हमें मारपीट और कठोर व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है।
हाल ही में हमें कांजीहाउस में बंद कर दिया गया, जहाँ भोजन और पानी की उचित व्यवस्था नहीं थी। इससे हमें अत्यधिक कष्ट हुआ। पशु भी संवेदनशील प्राणी होते हैं और उन्हें भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि हमारी शिकायत पर ध्यान देकर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करें तथा यह सुनिश्चित करें कि पशुओं के साथ किसी प्रकार की क्रूरता न हो।
धन्यवाद।
भवदीय,
हीरा एवं मोती
(पीड़ित बैल)
हमारी धरोहर और संस्कृति
- “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!”
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदा ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तरः हीरा और मोती ने तीन कार्य कभी नहीं किए –
औरत जात पर सींग चलाना
गिरे हुए बैरी पर सींग चलाना
कायरता से भागना
“गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” - “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।” हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तरः हीरा के इन कथनों से निम्नलिखित भारतीय मूल्यों की ओर संकेत मिलता है –
अहिंसाः गिरे हुए दुश्मन पर हमला न करना (योद्धा-धर्म)
स्त्री सम्मानः औरत जात पर सींग न चलाना
धर्म और नैतिकताः “हम अपना धर्म क्यों छोड़ें?”
दया और क्षमाः कमजोर या हारे हुए पर क्रूरता न करना
साहस और स्वाभिमानः अन्याय के सामने झुकना नहीं, लेकिन नैतिक सीमा का पालन करना - “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तरः पारंपरिक कृषि उपकरणः
हलः बैलों की मदद से खेत जोतने के लिए
जुआ: बैलों की गरदन में बाँधा जाने वाला लकड़ी का यंत्र
बैलगाड़ीः अनाज, घास, सामान ढोने के लिए
कुदाल, फावड़ा, हँसियाः खेत तैयार करने, खरपतवार निकालने और फसल काटने के लिए
लकड़ी का लंगरः पारंपरिक हल का एक प्रकार
आधुनिक कृषि उपकरणः
ट्रैक्टरः हल जोतना, खेत तैयार करना, गाड़ी खींचना (बहुत तेज और कम मेहनत)
हार्वेस्टरः फसल काटना और थ्रेशिंग (दाने अलग करना) एक साथ
पावर टिलरः छोटे खेतों में जुताई के लिए
सीड ड्रिलः बीज बोने के लिए
पंप सेट / स्प्रेयरः सिंचाई और दवा छिड़कने के लिए
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तरः भारत में बैल कृषि संस्कृति का प्रतीक हैं। वे केवल पशु नहीं, बल्कि गाँव की जीवनशैली का हिस्सा हैं:
गाँवों में बैल के कामः
खेत जोतना (हल चलाना)
बैलगाड़ी खींचना (अनाज, घास, लोग ले जाना)
पूजा-अर्चना में उपयोग (बैल-पूजा, गौ-पूजा, त्योहारों पर सजाना)
लोक-कथाओं, गीतों और कहानियों में प्रतीक (जैसे “दो बैलों की कथा”)
शहरों / कस्बों में बैल के कामः
कुछ पुराने इलाकों में छोटी बैलगाड़ियाँ अभी भी सामान ढोने के काम आती हैं
मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बैलों को पूजा जाता है
पर्यटन स्थलों पर बैलगाड़ी सवारी (कुछ गाँवों/कस्बों में)
कृषि-आधारित उद्योगों (दूध, गोबर) में बैल अप्रत्यक्ष रूप से सहायक
अलग-अलग और साथ-साथ
- कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तरः
हीरा की विशेषताएँ:
सहनशील – वह मोती से ज्यादा सहनशील था। जब मोती गाड़ी को खाई में गिराना चाहता था, हीरा
ने संभाल लिया।
समझदार और शांत वह हमेशा मोती को समझाता था। साँड़ से लड़ाई के समय उसने योजना ब नाई – “मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो।”
धर्मनिष्ठ – वह नैतिकता कभी नहीं छोड़ता था। गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना, औरत जात पर सींग न चलाना – ये उसके सिद्धांत थे।
मेहनती और वफादार – झूरी के प्रति पूरी निष्ठा रखता था।
मोती की विशेषताएँ:
गुस्सैल – गया द्वारा डंडे मारने पर उसका गुस्सा काबू के बाहर हो गया और वह हल लेकर भागा।
साहसी और विद्रोही कॉजीहाउस में सबसे पहले दीवार तोड़ने का साहस उसने दिखाया।
भावुक – हीरा को बंधा देखकर उसकी आँखों में आँसू आ गए।
मेहनती – दोनों बैल मेहनती थे, लेकिन मोती में विद्रोह की चिंगारी ज्यादा थी। - हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-
कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं।कैसे?
उत्तरः
समान विशेषताएँ:
दोनों बहुत मेहनती थे।
दोनों में भाईचारा और वफादारी थी।
दोनों ने मिलकर साँड़ से लड़ा, दीवार तोड़ी और घर लौटने का फैसला लिया।
भिन्न विशेषताएँ:
हीरा शांत, समझदार, सहनशील, धर्मनिष्ठ
मोती गुस्सैल, साहसी, भावुक, विद्रोही
एक-दूसरे को कैसे पूरा करते थे?
जब मोती गुस्से में आकर सींग चलाने या भागने को तैयार होता, हीरा उसे रोककर सही रास्ता दि खाता था।
जब हीरा ज्यादा सहनशील होकर चुप रह जाता, मोती उसे साहस देता और दीवार तोड़ने में मदद करता था।
साँड़ से लड़ाई में हीरा ने योजना बनाई और मोती ने पीछे से हमला किया।
कॉजीहाउस में हीरा ने दीवार पर पहला हमला किया, मोती ने उसे पूरा किया। - आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। ब ताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजि ए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
उत्तर :
मैं अपने भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठियों से यह अपेक्षा करता/करती हूँ कि वे मेरे साथ सम्मान, सहयोग, मित्रता और समानता का व्यवहार करें। वे मेरी भावनाओं, विचारों और क्षमताओं का आदर करें तथा मेरी कमजोरियों का मज़ाक न उड़ाएँ। आवश्यकता पड़ने पर मेरी सहायता करें और मुझे प्रोत्साहित करें।
जब मैंने अपने सहपाठियों से पूछा, तो उन्होंने बताया कि वे भी मुझसे सम्मानजनक, सहयोगपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं। वे चाहते हैं कि मैं उनकी बात ध्यान से सुनूँ, उनकी भावनाओं को समझूँ, उनकी भिन्नताओं को स्वीकार करूँ तथा किसी प्रकार का भेदभाव न करूँ।
- दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-
विनिमय करते थे।” कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर :
मेरे विचार से हीरा और मोती वास्तव में शब्दों से नहीं, बल्कि अपनी आँखों, हाव-भाव, पूँछ, कानों की गतिविधियों और शरीर की मुद्राओं से एक-दूसरे से बातें करते होंगे। जब वे प्रसन्न होते होंगे, तो एक-दूसरे को चाटकर या पूँछ हिलाकर अपना स्नेह व्यक्त करते होंगे। दुखी होने पर उनकी आँखों और चेहरे के भावों से उनका दुःख प्रकट हो जाता होगा।
किसी कठिन परिस्थिति में वे एक-दूसरे की ओर देखकर संकेत करते होंगे कि क्या करना है। जैसे गया के घर से भागने की योजना बनाते समय या सांड से मुकाबला करते समय वे आँखों और इशारों से अपने विचार साझा करते होंगे। भूख, प्यास, भय, क्रोध और खुशी जैसी भावनाएँ भी वे अपने हाव-भाव द्वारा व्यक्त करते होंगे।
इस प्रकार हीरा और मोती के बीच इतना गहरा प्रेम और समझ थी कि बिना बोले ही वे एक-दूसरे की भावनाओं और विचारों को समझ लेते थे। यही उनकी ‘मूक-भाषा’ थी।
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर :
हम अपने दैनिक जीवन में अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए भी संवाद करते हैं। इसे अशाब्दिक संवाद कहते हैं।
कुछ उदाहरण :
- कक्षा में शिक्षक के प्रश्न का उत्तर देने के लिए हाथ उठाना।
- सहमति जताने के लिए सिर हिलाना।
- असहमति व्यक्त करने के लिए सिर को दाएँ-बाएँ हिलाना।
- मुस्कुराकर खुशी या मित्रता का भाव प्रकट करना।
- आँखों के संकेत से किसी को बुलाना या किसी ओर ध्यान दिलाना।
- तालियाँ बजाकर प्रशंसा व्यक्त करना।
- हाथ जोड़कर नमस्ते करना।
- अंगूठा ऊपर दिखाकर किसी कार्य की सराहना करना।
- चुप रहने का संकेत देने के लिए होंठों पर उंगली रखना।
- खेल के मैदान में इशारों से साथी खिलाड़ियों को निर्देश देना।
- हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर :
हाँ, एक बार मैं अपने परिवार के साथ किसी नए स्थान पर गया/गई था/थी। वहाँ घूमते समय मैं अपने साथियों से अलग हो गया/गई और रास्ता भूल गया/गई। पहले तो मुझे थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन मैंने धैर्य रखा। मैंने आसपास के लोगों से सही रास्ता पूछा और अपने मोबाइल की सहायता से स्थान का पता लगाया। इसके बाद मैं सही मार्ग पर पहुँच गया/गई और अपने परिवार से मिल गया/गई।
इस घटना से मैंने सीखा कि यदि कभी रास्ता भटक जाएँ, तो घबराने के बजाय शांत रहकर समझदारी से सहायता लेनी चाहिए।
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक प हुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तर :
यदि कोई व्यक्ति रास्ता भटक जाए, तो उसे घबराने के बजाय धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए वह निम्नलिखित उपाय कर सकता है—
- शांत और संयमित रहे, घबराए नहीं।
- आस-पास के लोगों से सहायता और सही मार्ग की जानकारी प्राप्त करे।
- मोबाइल फोन, नक्शे (मैप) या जीपीएस का उपयोग करे।
- किसी पुलिसकर्मी, सुरक्षा कर्मी या विश्वसनीय व्यक्ति से मदद ले।
- यदि साथियों से बिछड़ गया हो, तो उन्हें फोन करके अपनी स्थिति बताए।
- सुनसान या असुरक्षित स्थानों पर जाने से बचे।
- आसपास के दुकानों, भवनों या प्रमुख स्थलों (लैंडमार्क) को पहचानकर दिशा का अनुमान लगाए।
- आवश्यकता पड़ने पर अपने परिवार या परिचितों से संपर्क करे।
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है?
मैंने अपने विद्यालय में लगे आपदा निकासी मानचित्र का अवलोकन किया। मानचित्र के अनुसार हमारी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित निकासी मार्ग मुख्य गलियारे से होकर विद्यालय के खुले मैदान तक जाता है। आपदा की स्थिति में हमें उसी मार्ग का उपयोग करते हुए शांतिपूर्वक और अनुशासन के साथ निर्धारित सुरक्षित स्थान पर पहुँचना चाहिए।”
सृजन
- हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
दिनांक : ________
प्रिय डायरी,
आज का दिन मेरे जीवन के सबसे दुःखद दिनों में से एक था। मैं और मेरा मित्र मोती बहुत परेशान हैं। हमें पकड़कर काँजीहाउस में बंद कर दिया गया है। यहाँ न तो पर्याप्त चारा है और न ही पानी। भूख और प्यास से हमारा बुरा हाल है।
काँजीहाउस में अनेक पशु बंद हैं। सभी दुखी और कमजोर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें देखकर हमारा मन और भी व्यथित हो जाता है। हमें अपने मालिक झूरी की बहुत याद आ रही है। वह हमसे कितना प्रेम करता था! उसके घर पर हमें भरपेट भोजन मिलता था और स्नेह भी।
आज हमने सोचा कि किसी तरह यहाँ से निकलना चाहिए। हमने दीवार तोड़ने का प्रयास भी किया, ताकि हम स्वयं तो मुक्त हों ही, अन्य पशुओं को भी आज़ादी मिल सके। यद्यपि हमें इसके लिए मार भी खानी पड़ी, फिर भी हमने हिम्मत नहीं हारी।
मुझे विश्वास है कि एक दिन हम फिर अपने प्रिय मालिक के पास लौटेंगे। आज की कठिनाइयों ने हमें यह सिखाया है कि स्वतंत्रता सबसे बड़ा सुख है और बंधन सबसे बड़ा दुःख।
तुम्हारा मित्र
हीरा
2. आज के समाचार मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के कॉजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
काँजीहाउस से दो बैल फरार, कई पशुओं को भी मिली आज़ादी
संवाददाता : विशेष प्रतिनिधि
स्थान : स्थानीय नगर
कल रात नगर के काँजीहाउस में एक अनोखी घटना घटी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हीरा और मोती नामक दो बैलों ने काँजीहाउस की कच्ची दीवार तोड़कर वहाँ से भागने का प्रयास किया। इस दौरान दीवार का एक हिस्सा गिर गया, जिससे वहाँ बंद कई अन्य पशुओं को भी बाहर निकलने का अवसर मिल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों बैल कई दिनों से भूख और प्यास की कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। स्वतंत्र होने की तीव्र इच्छा के कारण उन्होंने पूरी शक्ति लगाकर दीवार को कमजोर कर दिया। दीवार गिरते ही कई पशु बाहर निकल गए और सुरक्षित स्थानों की ओर भाग निकले।
काँजीहाउस के कर्मचारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन अंधेरा होने के कारण सभी पशुओं को तुरंत पकड़ पाना संभव नहीं हो सका। घटना के बाद स्थानीय लोगों में पशुओं की देखभाल और उनके अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, हीरा और मोती अंततः अपने पुराने मालिक झूरी के घर पहुँच गए, जहाँ उनका प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इस घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि स्वतंत्रता सभी प्राणियों के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
— समाप्त —
- कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कहानी का नया अंत
काँजीहाउस से निकलने के बाद हीरा और मोती अपने घर का रास्ता भूल गए। वे कई दिनों तक इधर-उधर भटकते रहे। रास्ते में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कभी उन्हें भोजन नहीं मिला, तो कभी जंगली जानवरों का डर सताता रहा। फिर भी दोनों मित्र एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते थे।
एक दिन वे एक किसान के खेत के पास पहुँचे। किसान ने देखा कि दोनों बैल बहुत कमजोर और थके हुए हैं। उसे उन पर दया आ गई। उसने उन्हें चारा-पानी दिया और उनकी देखभाल की। धीरे-धीरे दोनों स्वस्थ हो गए।
किसान उनके परिश्रम और समझदारी से बहुत प्रभावित हुआ। उसने उन्हें अपने पास ही रख लिया। हीरा और मोती भी उसके साथ खुशी-खुशी रहने लगे, क्योंकि वह उनके साथ प्रेम और दया का व्यवहार करता था।
हालाँकि उन्हें अपने पुराने मालिक झूरी की याद आती थी, लेकिन वे यह समझ चुके थे कि सच्चा सुख वहीं है जहाँ प्रेम, सम्मान और अपनापन मिलता है। इस प्रकार दोनों मित्र अपने नए जीवन में संतुष्ट और सुखी रहने लगे।
शिक्षा: प्रेम, मित्रता और स्वतंत्रता जीवन के सबसे बड़े सुख हैं।
- चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए।
प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम दोनों वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
क्रम का ध्यान रखें- बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।
(संकेत- चित्र 4: “अब हम आज़ाद हैं!”)

| चित्र | संवाद | घटनाक्रम |
|---|---|---|
| चित्र 1 (काँजीहाउस में बंद करना) | मोती: “हीरा, हमें यहाँ क्यों बंद कर दिया गया है?” | हीरा और मोती को पकड़कर काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। |
| चित्र 2 (भागने की योजना) | हीरा: “हमें यहाँ से निकलने का कोई उपाय सोचना होगा।” | दोनों मित्र आज़ाद होने के लिए भागने की योजना बनाते हैं। |
| चित्र 3 (दीवार तोड़ना) | मोती: “पूरी ताकत लगाओ, दीवार टूटने वाली है!” | हीरा और मोती अपनी पूरी शक्ति से काँजीहाउस की दीवार तोड़ने लगते हैं। |
| चित्र 4 (आज़ादी) | हीरा और मोती: “अब हम आज़ाद हैं!” | दीवार टूट जाती है और दोनों मित्र अन्य पशुओं के साथ स्वतंत्र हो जाते हैं। |
भाषा से संवाद
मेरे शब्द
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अप
ने अनुसार लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तरः
निरापद अनुमानः सुरक्षित शब्दकोशः आपत्ति से रहित, निर्विघ्न
सहिष्णुता अनुमानः सहनशीलता शब्दकोशः सहनशीलता, क्षमा
पराकाष्ठा अनुमानः अंतिम सीमा शब्दकोशः चरम कोटि, अंतिम सीमा
उजड्डडुपन अनुमानः बदतमीजी शब्दकोशः अशिष्टता, उदंडता
बेतहाशा अनुमानः तेजी से शब्दकोशः बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे
भाषा गढ़ते मुहावरे
“लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।”
“मन फीका करना” एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी
से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी टूटना होना आदि। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में कई मुहावरों का बहुत ही सुंदर और सटीक प्रयोग हुआ है।
कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए।
इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| 1. दाँतों पसीना आ जाना | बहुत कठिन परिश्रम करना | बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते-करते मेरे दाँतों पसीना आ गया। |
| 2. दिल काँप उठना | बहुत डर जाना | रात को अचानक तेज आवाज सुनकर मेरा दिल काँप उठा। |
| 3. जल उठना | क्रोधित हो जाना | अपनी हार की बात सुनकर वह जल उठा। |
| 4. दिल ऐंठकर रह जाना | मन में दुख या गुस्सा दबाकर रह जाना | मित्र की कठोर बात सुनकर मेरा दिल ऐंठकर रह गया। |
| 5. खबर लेना | सबक सिखाना या अच्छी तरह देख लेना | यदि वह फिर शरारत करेगा, तो मैं उसकी खबर लूँगा। |
| 6. गम खा जाना | अपमान या दुख को चुपचाप सह लेना | उसने सबकी बातें सुन लीं, लेकिन गम खाकर चुप रहा। |
| 7. ईंट का जवाब पत्थर से देना | बदले में अधिक कठोर उत्तर देना | सैनिकों ने दुश्मनों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया। |
| 8. नौ-दो-ग्यारह होना | भाग जाना | पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो-ग्यारह हो गया। |
गतिविधियाँ
- कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र
“बाल-सभा ने निर्णय किया, दोनों पशुओं को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।”
(क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। उसकी कल्पना से वह गीत लिखिए।
हीरा-मोती वीर हमारे
हीरा-मोती वीर हमारे,
सबके प्यारे, सबसे न्यारे।
मित्रता की मिसाल निराली,
संकट में भी साथ न टाली।
दुख-सुख में संग-संग रहते,
प्रेम के दीप सदा ही जलते।
अन्याय से जो कभी न डरे,
साहस से हर संकट हरे।
स्वतंत्रता के थे रखवाले,
सच्चे, सरल और मतवाले।
मेहनत, साहस, प्रेम सिखाया,
जीवन का सच्चा मार्ग बताया।
हीरा-मोती वीर हमारे,
सबके प्यारे, सबसे न्यारे।
(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
अभिनंदन-पत्र
बाल-सभा द्वारा हीरा एवं मोती के सम्मान में
प्रिय हीरा और मोती,
हमारी बाल-सभा की ओर से आपको हार्दिक अभिनंदन एवं शुभकामनाएँ।
आपने अपनी सच्ची मित्रता, साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रेम का अद्भुत परिचय दिया है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आपने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। अन्याय और अत्याचार का डटकर सामना करते हुए आपने यह सिद्ध कर दिया कि साहस और दृढ़ संकल्प से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
आपकी निष्ठा, परिश्रम और मित्रता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने हमें सिखाया है कि सच्चा मित्र वही होता है जो हर परिस्थिति में साथ निभाए तथा स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करे।
आपके उज्ज्वल चरित्र और प्रेरणादायक कार्यों के लिए बाल-सभा आपको यह अभिनंदन-पत्र सादर भेंट करती है।
आपकी मित्रता अमर रहे!
बाल-सभा
विद्यालय __________
दिनांक : __________
- बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपके बाल-सभा में हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के इच्छुक सदस्य हैं। भाषण का विषय है-“पशुओं के अधिकार”। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
विषय : पशुओं के अधिकार
आदरणीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित शिक्षकगण एवं मेरे प्रिय साथियों,
आप सभी को मेरा सादर नमस्कार।
आज मैं “पशुओं के अधिकार” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करना चाहता/चाहती हूँ।
पशु भी हमारे जैसे जीवित प्राणी हैं। उनमें भी दर्द, खुशी, भय और प्रेम की भावनाएँ होती हैं। इसलिए उन्हें भी सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पशु हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वे खेती, परिवहन और अनेक कार्यों में हमारी सहायता करते हैं।
‘दो बैलों की कथा’ के हीरा और मोती हमें यह सिखाते हैं कि पशुओं में भी आत्मसम्मान, मित्रता और स्वतंत्रता की भावना होती है। जब उनके साथ अन्याय और अत्याचार किया गया, तो उन्होंने उसका विरोध किया। इससे स्पष्ट होता है कि पशु भी सुख-दुःख का अनुभव करते हैं।
हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पशुओं को पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित आश्रय और उचित चिकित्सा सुविधा मिले। उनके साथ मारपीट, क्रूरता और शोषण नहीं होना चाहिए। पशुओं के प्रति दया और संवेदनशीलता रखना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
आइए, हम सभी यह संकल्प लें कि हम पशुओं के साथ प्रेम और करुणा का व्यवहार करेंगे तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
धन्यवाद।
जय हिंद!
- शीर्षक
इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
| भाग | उपयुक्त शीर्षक |
|---|---|
| भाग 1 | हीरा और मोती की मित्रता |
| भाग 2 | गया के घर का कष्टमय जीवन |
| भाग 3 | स्वतंत्रता की खोज और संघर्ष |
| भाग 4 | काँजीहाउस की कैद और साहस |
| भाग 5 | घर वापसी और सम्मान |
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए
जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, घर, रस्सी, रोटी
मेरी पहेलियाँ
1. हीरा
कहानी का मैं हूँ एक बैल,
मित्रता में हूँ सबसे अव्वल।
मोती का सच्चा साथी हूँ,
बताओ मैं कौन हूँ?
उत्तर – हीरा
2. झूरी
पशुओं से करता था प्यार,
न करता था कभी अत्याचार।
हीरा-मोती जिसके थे दुलारे,
बताओ उसके नाम के बारे में।
उत्तर – झूरी
3. मोती
हीरा का मैं प्यारा मित्र,
साहस मेरा बहुत विचित्र।
कठिन समय में साथ निभाया,
बताओ मेरा नाम क्या भाया?
उत्तर – मोती
4. गया
झूरी का था मैं रिश्तेदार,
ले गया बैलों को अपने द्वार।
कठोर व्यवहार किया था मैंने,
बताओ मेरा नाम क्या है?
उत्तर – गया
5. बैल
खेतों में मैं काम करूँ,
हल खींचकर नाम करूँ।
किसानों का सच्चा साथी,
बताओ मैं कौन कहलाता?
उत्तर – बैल
6. घर
जहाँ मिलता प्रेम अपार,
जहाँ होता अपना संसार।
लौटकर आए हीरा-मोती जहाँ,
बताओ वह स्थान है कहाँ?
उत्तर – घर
7. रस्सी
मुझसे पशु बाँधे जाते,
खूँटे से जोड़े जाते।
मजबूत हूँ पर पतली भी,
बताओ मैं कौन हूँ जी?
उत्तर – रस्सी
8. रोटी
आटे से मैं बन जाती,
भूख सभी की मिटाती।
छोटी लड़की बैलों को देती,
बताओ मैं क्या कहलाती?
उत्तर – रोटी
भाषा संगम
“कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”
नीचे ‘बैल’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त श ब्दों की सूची दी गई है-
बैल (हिंदी), गड्डु (संस्कृत), बॉल्द (पंजाबी), बेल (उर्दू), बोंद (कश्मीरी), हमो (सिंधी), बला (मराठी), बडद (गुजराती), बेल (कोंकणी), गोड़ (नेपाली), बलद (बांग्ला), गोंड, वलद (असमिया), रसा बलद (मणिपुरी), बलद (ओड़िया), एण्टु (तेलुगु), पांडु (तमिल), कळो (मलयालम), एरुथु (कन्नड़)
इन शब्दों की सूची में ‘बैल’ शब्द के लिए किसी और भाषा में भी जानने हों तो उस भाषा में भी लिखिए।
उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तरः (मैं हिंदी-भाषी क्षेत्र से हूँ, इसलिए अतिरिक्त भाषा के रूप में अवधी में लिख रहा हूँ, जो उत्तर प्रदेश में बोली जाती है ) अवधी बैल (या लोक-बोली में बइल / सांड)
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
मातृभाषा (हिंदी): “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”
अवधी (स्थानीय बोली): “कभ-कभ अड़ियल बैल भी देखे में आवे है।”
अगर आपकी मातृभाषा हरियाणवी है, तोः
“कदे-कदे जिद्दी बैल भी देखण में आवे सै।”
अगर भोजपुरीः
“कभी-कभी हठी बइलो देखे के मिलेला।”

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