grade -9 गंगा (भाग–1) ‘रैदास के पद’ LESSON PLAN
शिक्षण उद्देश्य
1. ज्ञानात्मक
- छात्र संत रैदास के जीवन एवं साहित्य से परिचित होंगे।
- छात्र पदों के भावार्थ एवं संदेश को समझ सकेंगे।
- छात्र भक्ति आंदोलन की विशेषताओं को जान सकेंगे।
2. कौशलात्मक
- छात्र पदों का शुद्ध उच्चारण के साथ सस्वर वाचन कर सकेंगे।
- छात्र कठिन शब्दों के अर्थ समझकर उनका प्रयोग कर सकेंगे।
- छात्र पदों का भावार्थ अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
3. बोधात्मक
- छात्रों में ईश्वर के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण की भावना विकसित होगी।
- छात्रों में प्रेम, भक्ति, विश्वास एवं मानवता के मूल्यों का विकास होगा।
4. प्रयोगात्मक
- छात्र पदों में निहित जीवन-मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाने का प्रयास करेंगे।
- छात्र भक्ति एवं नैतिकता से संबंधित विचारों को जीवन में प्रयोग कर सकेंगे।
सहायक शिक्षण सामग्री
- श्यामपट्ट, चाक एवं डस्टर
- पाठ्यपुस्तक
- संत रैदास का चित्र
- पावर पॉइंट प्रस्तुति
- कार्यपत्रक
पूर्व ज्ञान
- छात्र भक्ति काल के कवियों से परिचित हैं।
- छात्र ईश्वर-भक्ति एवं संत परंपरा के बारे में सामान्य जानकारी रखते हैं।
- छात्र पद एवं भजन सुन चुके हैं।
प्रस्तावना प्रश्न
- क्या आपने कभी किसी भजन या पद का गायन सुना है?
- भक्ति का क्या अर्थ है?
- संत कवि समाज को क्या संदेश देते हैं?
- ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा कैसे प्रकट की जा सकती है?
उद्देश्य कथन
बच्चो! आज हम महान संत कवि रैदास द्वारा रचित ‘रैदास के पद’ का अध्ययन करेंगे। इन पदों में कवि ने ईश्वर के प्रति अपनी अटूट भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त किया है।
पाठ की इकाइयाँ
प्रथम अन्विति
(अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी ………… ऐसी भक्ति करै रैदासा)
- ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम
- चंदन और पानी का संबंध
- घन और मोर का संबंध
- दीपक और बाती का संबंध
- मोती और धागे का संबंध
- दास्य भाव की अभिव्यक्ति
द्वितीय अन्विति
(जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ ………… कहै रैदासा)
- ईश्वर से अटूट संबंध
- तीर्थ और व्रत से अधिक भक्ति का महत्व
- प्रभु पर पूर्ण विश्वास
- संसार से विरक्ति
- मन, कर्म और वचन से ईश्वर स्मरण
शिक्षण विधि
| क्रमांक | अध्यापक-क्रिया | छात्र-क्रिया |
| 1 | पदों का सस्वर वाचन एवं भावपूर्ण प्रस्तुति करना। | ध्यानपूर्वक सुनना एवं भाव ग्रहण करना। |
| 2 | संत रैदास का परिचय देना। | आवश्यक तथ्य लिखना। |
| 3 | पदों का आदर्श वाचन करना। | शुद्ध उच्चारण पर ध्यान देना। |
| 4 | पदों का भावार्थ समझाना। | भावार्थ समझना एवं प्रश्न पूछना। |
| 5 | उपमाओं एवं प्रतीकों की व्याख्या करना। | उदाहरणों को समझना। |
| 6 | कठिन शब्दों के अर्थ स्पष्ट करना। | शब्दार्थ लिखना। |
| 7 | छात्रों से सस्वर पाठ करवाना। | उचित लय एवं गति से वाचन करना। |
| 8 | पदों में निहित जीवन-मूल्यों पर चर्चा करना। | अपने विचार व्यक्त करना। |
| 9 | व्याकरणिक बिंदुओं का अभ्यास कराना। | अभ्यास-पुस्तिका में कार्य करना। |
कवि परिचय
संत रैदास भक्ति काल के प्रसिद्ध संत कवि थे। उनका जन्म वाराणसी में माना जाता है। वे निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख कवि थे। उन्होंने प्रेम, समानता, मानवता तथा ईश्वर-भक्ति का संदेश दिया। उनकी भाषा सरल, सहज एवं लोकप्रचलित थी। उनके पद आज भी भक्ति एवं आध्यात्मिकता के लिए प्रसिद्ध हैं।
कठिन शब्दार्थ
- चंदन – सुगंधित वृक्ष
- बास – सुगंध
- घन – बादल
- चितवत – देखना
- चकोर – चंद्रमा का प्रेमी पक्षी
- जोति – प्रकाश
- बाती – दीपक की बत्ती
- सुहागा – सोने को शुद्ध करने वाला पदार्थ
- दासा – सेवक
- तीरथ – पवित्र स्थान
- अंदेसा – आशंका, चिंता, डर
- भरोसा – विश्वास
- चरन कमल – भगवान के चरण
गतिविधियाँ
- पदों का समूहगान।
- “सच्ची भक्ति क्या है?” विषय पर चर्चा।
- पदों में प्रयुक्त उपमाओं का चार्ट बनाना।
- रैदास के जीवन पर परियोजना तैयार करना।
- पदों का कंठस्थ वाचन।
गृह-कार्य
- दोनों पदों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।
- रैदास के जीवन-परिचय पर 100 शब्द लिखिए।
- पदों में प्रयुक्त उपमाओं को लिखिए।
- कठिन शब्दों के अर्थ याद कीजिए।
परियोजना कार्य
विषय : “भक्ति काल के संत कवि”
रैदास, कबीर, मीरा अथवा सूरदास में से किसी एक संत कवि के जीवन एवं साहित्य पर चित्र सहित परियोजना तैयार कीजिए।
मूल्यांकन
- रैदास के अनुसार सच्ची भक्ति क्या है?
- कवि ने चंदन और पानी की उपमा क्यों दी है?
- “प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती” का भाव स्पष्ट कीजिए।
- कवि तीर्थ और व्रत की अपेक्षा किसे अधिक महत्व देते हैं?
- पदों से प्राप्त नैतिक शिक्षा लिखिए।
शिक्षण निष्कर्ष
‘रैदास के पद’ ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण, विश्वास और भक्ति की भावना को व्यक्त करते हैं। ये पद विद्यार्थियों को मानवता, समानता तथा आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश देते हैं।

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