कक्षा 9 हिंदी (गंगा) के अध्याय 2 ‘क्या लिखूँ?’ के प्रश्न-उत्तर, कठिन शब्दों के अर्थ, सारांश, व्याकरण तथा अभ्यास के सभी प्रश्नों के समाधान विद्यार्थी यहाँ से निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
यह निबंध प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्वारा लिखा गया है। इसमें लेखक ने बड़े ही रोचक और हास्यपूर्ण ढंग से बताया है कि निबंध लिखना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार विषय तो मिल जाता है, लेकिन उस पर लिखने के लिए उचित विचार नहीं सूझते।
लेखक ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’ जैसे विषयों का उदाहरण देकर बताते हैं कि अच्छा निबंध केवल विषय पर नहीं, बल्कि लेखक की सोच, अनुभव और भावनाओं पर भी निर्भर करता है। इसलिए निबंध लिखते समय अपने विचारों को सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।
इस पृष्ठ पर सत्र 2026–27 के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार इस अध्याय की सभी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री सरल भाषा में उपलब्ध है, जैसे—
- व्याकरण (समास, उपसर्ग-प्रत्यय आदि)
- महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
- परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी अध्ययन सामग्री
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
- “हैट टॉगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
उत्तरः (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
तर्कः ए.जी. गार्डिनर का यह कथन यह स्पष्ट करता है कि निबंध लेखन में विषय (खूँटी)
गौण होता है और लेखक के भाव तथा मनोदशा (हैट) प्रमुख होती है। विषय केवल एक आधार है, असली महत्त्व लेखक की आंतरिक अनुभूति और भावों का है। - “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(क) शैली और स्पष्ट सहज भाषा को महत्व न देना
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
उत्तरः (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
तर्कः मानटेन ने जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया उसे अपने निबंधों में लिपिबद्ध किया। उनके निबंधों में लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता था। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने यह निर्णय लिया कि वे भी अपने स्वयं के अनुभव और ज्ञान के आधार पर स्वच्छंद रूप से निबंध लिखेंगे। - “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद….” यह तुलना किस पर
आधारित है?
(क) तर्क और भावना
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
उत्तरः (घ) अभिलाषा और अनुभव
तर्कः तरुण अनुभवहीन होते हैं इसलिए वे भविष्य की अभिलाषाओं में जीते हैं, जबकि वृद्धों के पास जीवन का संचित अनुभव होता है जो उन्हें अतीत की स्मृतियों में सुख देता है। यह तुलना इन्हीं दो आधारों अभिलाषा और अनुभव पर टिकी है। - निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
उत्तरः (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए तर्कः लेखक को दो विषयों पर निबंध लिखने थे। अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चार औरतों की चार अलग-अलग इच्छाओं की पूर्ति कर दी थी। इसी से प्रेरित होकर लेखक ने भी एक ही निबंध में दोनों विषयों को समाहित करने का उपाय ढूँढा। - निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
उत्तरः (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
तर्कः लेखक ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो। बुद्धदेव से लेकर महात्मा गांधी तक हर युग में सुधारक हुए हैं। जो सुधार था वही आज दोष बन जाता है, और उस दोष का फिर नव-सुधार किया जाता है।
मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
- निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
उत्तरः ए.जी. गार्डिनर के अनुसार निबंध लिखने के लिए एक विशेष मानसिक स्थिति होती है जिसमें हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग स्वतः उत्पन्न हो जाता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती और कोई भी विषय हो लेखक उसमें अपने हृदय के आवेग को भर देता है।
इसके विपरीत लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को ऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव नहीं होता। उन्हें सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है और परिश्रम करना पड़ता है। वे गार्डिनर के कथन की यथार्थता में संदेह नहीं करते, परंतु उनके लिए निबंध लिखना स्वाभाविक नहीं बल्कि एक कठिन परिश्रम साध्य कार्य है। - लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तरः तरुण वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं क्योंकि वे अपनी महत्त्वाकांक्षाओं और स्वप्नों को वर्तमान में साकार होते नहीं देखते। वे भविष्य में बड़े परिवर्तन और क्रांति चाहते हैं और वर्तमान की धीमी गति से व्याकुल रहते हैं।
वृद्ध वर्तमान से असंतुष्ट इसलिए रहते हैं क्योंकि वर्तमान उनके अनुभव में संचित अतीत की सुखद स्मृतियों से मेल नहीं खाता। वे चाहते हैं कि पुरानी परंपराएँ, मूल्य और व्यवस्थाएँ बनी रहें, परंतु तेज़ी से बदलता समाज उन्हें अपरिचित लगता है।
- नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
उत्तरः निमिता चाहती है कि लेखक “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर निबंध लिखें और अमिता चाहती है कि “समाज-सुधार” विषय पर निबंध लिखा जाए।
लेखक को निम्नलिखित कठिनाइयाँ आईं पहली, लेखक को गार्डिनर जैसी स्वतःस्फूर्त मानसिक स्थिति उपलब्ध नहीं थी। दूसरी, उनके पास न विश्वकोश था और न कोई संदर्भग्रंथ। तीसरी, निबंधशास्त्र के आचार्यों के परस्पर विरोधी मत किसी ने छोटे निबंध की, किसी ने लंबे वाक्यों की, किसी ने सरल भाषा की सलाह दी उलझन बढ़ा रहे थे। चौथी, विषयों कीरूपरेखा बनाना भी कठिन था क्योंकि गार्डिनर स्वयं शीर्षक देने का भार मित्रों पर छोड़ देते थे। - निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
-उत्तरः निबंधशास्त्र के आचार्यों ने निम्नलिखित युक्तियाँ सुझाई हैं निबंध छोटा होना चाहिए क्योंकि छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है। निबंध के दो प्रमुख अंग हैं सामग्री और शैली। पहले विचार-समूह संचित करने चाहिए, मनन करना चाहिए। भाषा में प्रवाह होना चाहिए और वाक्य छोटे-छोटे पर एक-दूसरे से संबद्ध होने चाहिए। रूपरेखा पहले से बना लेनी चाहिए।
अपनी तैयारी के बारे में विद्यार्थी स्वयं उत्तर लिखें। सामान्यतः हम पहले विषय को समझते हैं, उससे संबंधित विचार और उदाहरण एकत्र करते हैं, रूपरेखा बनाते हैं और फिर क्रमबद्ध रूप से लिखते हैं। - मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
उत्तरः निबंध लेखन के लिए देखना, सुनना और अनुभव करना अत्यंत उपयोगी है क्योंकि इससे निबंध में जीवंतता और सत्यता आती है। जो बात लेखक ने स्वयं देखी हो वह पाठक के हृदय को सीधे स्पर्श करती है। अनुभव आधारित लेखन में लेखक की सच्ची भावनाएँ प्रतिबिंबित होती हैं जो पाठक को आकृष्ट करती हैं। सुनी हुई बातों और घटनाओं से लेखक को विविध दृष्टिकोण मिलते हैं जो निबंध को समृद्ध बनाते हैं। इस प्रकार मानटेन की पद्धति निबंध को कृत्रिम नहीं बल्कि स्वाभाविक और प्रभावशाली बनाती है।
निबंध लिखने की कला
1. निबंध क्या है?
निबंध गद्य की एक ऐसी विधा है जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने विचार, अनुभव, भावनाएँ और दृष्टिकोण को सरल, क्रमबद्ध तथा प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करता है।
‘निबंध’ शब्द का अर्थ है – भली-भाँति बाँधी गई रचना। एक अच्छा निबंध विषय को स्पष्ट, रोचक और तार्किक ढंग से प्रस्तुत करता है।
2. निबंध की प्रमुख विशेषताएँ
- विषय के विचारों का स्पष्ट और विस्तृत वर्णन होता है।
- सभी बातें क्रमबद्ध ढंग से लिखी जाती हैं।
- भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होती है।
- लेखक के विचार और भावनाएँ स्वाभाविक रूप से व्यक्त होती हैं।
- निबंध पढ़ने में रोचक और ज्ञानवर्धक होता है।
3. निबंध लिखने की प्रक्रिया
एक अच्छा निबंध लिखने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए—
- प्रेरणा – किसी विषय पर लिखने की इच्छा और विचार उत्पन्न होना।
- विषय का चयन – अपनी रुचि और जानकारी के अनुसार विषय चुनना।
- सामग्री संग्रह – विषय से संबंधित तथ्य, उदाहरण और आवश्यक जानकारी एकत्र करना।
- रूपरेखा बनाना – किन-किन बिंदुओं पर लिखना है, इसकी योजना तैयार करना।
- शैली का निर्धारण – भाषा और प्रस्तुतिकरण का उचित तरीका चुनना।
- लेखन और निष्कर्ष – क्रमबद्ध ढंग से निबंध लिखकर अंत में उचित निष्कर्ष देना।
4. मेरा निबंध लिखने का तरीका
मैं निबंध लिखने के लिए पहले विषय को अच्छी तरह समझता हूँ। उसके बाद मुख्य बिंदु लिखता हूँ और उनकी रूपरेखा तैयार करता हूँ। फिर सरल भाषा में क्रमबद्ध रूप से निबंध लिखता हूँ तथा अंत में विषय का सार या निष्कर्ष प्रस्तुत करता हूँ।
यह तरीका बेहतर इसलिए है क्योंकि इससे निबंध व्यवस्थित, स्पष्ट और प्रभावशाली बनता है।
5. शैली क्या है?
शैली का अर्थ है—अपने विचारों को प्रस्तुत करने का तरीका। प्रत्येक लेखक की अपनी अलग शैली होती है, जो उसकी रचना को विशेष बनाती है।
6. रूपरेखा बनाना क्यों आवश्यक है?
रूपरेखा बनाने से निबंध लिखना आसान हो जाता है। इससे सभी बातें सही क्रम में आती हैं और लेखक विषय से नहीं भटकता।
भाव-विस्तार
(1) “जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
उत्तर:
जो युवा अभी तक जीवन की कठिनाइयों और जिम्मेदारियों का सामना नहीं करते, उन्हें दुनिया बहुत सुंदर और आसान लगती है। लेकिन जैसे-जैसे वे जीवन के वास्तविक अनुभव प्राप्त करते हैं, उन्हें संघर्षों और चुनौतियों का भी पता चलता है। इसलिए अनुभव के साथ जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदल जाता है।
(2) “मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
उत्तर:
हर समय समाज में कुछ-न-कुछ समस्याएँ रही हैं। इसलिए प्रत्येक युग में समाज को बेहतर बनाने के लिए सुधारों की आवश्यकता पड़ती है। समय बदलने के साथ नई चुनौतियाँ सामने आती हैं और उन्हें दूर करने के लिए नए सुधार भी आवश्यक होते हैं।
(3) “आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
उत्तर:
आज के युवा परिवर्तन और नई सोच का समर्थन करते हैं। लेकिन समय बीतने पर वही लोग वृद्ध होकर अपने पुराने दिनों को याद करते हैं और उन्हें सबसे अच्छा समय मानने लगते हैं। यह जीवन का स्वाभाविक क्रम है कि हर पीढ़ी समय के साथ अपना दृष्टिकोण बदलती रहती है।
अतिरिक्त जानकारी
“निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
उत्तर:
अच्छे लेखक की पहचान यह है कि वह कम शब्दों में अपनी बात प्रभावशाली ढंग से कह सके। छोटा और सटीक निबंध पढ़ने में अधिक रोचक होता है। उसमें अनावश्यक बातें नहीं होतीं और मुख्य विचार स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। इसलिए संक्षिप्त, सारगर्भित और प्रभावशाली निबंध अधिक उपयोगी माना जाता है।
मेरा अनुभव
प्रश्न:
इस निबंध में लेखक को “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और “समाज-सुधार” विषयों पर निबंध लिखना था। आपने भी कई विषयों पर अनुच्छेद और निबंध लिखे होंगे। आपको कौन-सा विषय आसान और कौन-सा कठिन लगा? कारण सहित लिखिए।
उत्तर:
मुझे “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” विषय पर लिखना आसान लगा, क्योंकि यह एक प्रसिद्ध लोकोक्ति है और हमारे दैनिक जीवन के अनुभवों से जुड़ी हुई है। इसके लिए उदाहरण देना भी सरल होता है।
वहीं “समाज-सुधार” विषय पर लिखना थोड़ा कठिन लगा, क्योंकि यह बहुत बड़ा विषय है। इस पर अच्छा निबंध लिखने के लिए समाज की समस्याओं, सुधारकों और उनके कार्यों की जानकारी होना आवश्यक है।
विषयों से संवाद
प्रश्न:
निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, शंकराचार्य, कबीर और गुरु नानक जैसे महान व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है। इनके समाज-सेवा के कार्यों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
1. बुद्धदेव (गौतम बुद्ध)
गौतम बुद्ध ने लोगों को अहिंसा, दया, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। उन्होंने जाति-भेद और हिंसा का विरोध किया तथा शांति और मानवता का मार्ग दिखाया।
2. महावीर स्वामी
महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का उपदेश देकर लोगों को सादा और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दी।
3. आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के सिद्धांत का प्रचार किया। उन्होंने पूरे भारत की यात्रा करके धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत बनाया तथा समाज को सही दिशा दी।
4. कबीरदास
कबीर ने जाति-पाँति, ऊँच-नीच और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया। उन्होंने प्रेम, समानता और सच्ची भक्ति का संदेश अपने दोहों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया।
5. गुरु नानक देव
गुरु नानक देव जी ने ईश्वर की एकता, सभी मनुष्यों की समानता, सेवा और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को प्रेम, ईमानदारी और परोपकार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।
2. हमारे आसपास समाज-सेवा करने वाले व्यक्ति और संस्थाएँ
प्रश्न:
निबंध में कई महान व्यक्तियों का उल्लेख है जिन्होंने समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। आज भी अनेक व्यक्ति और संस्थाएँ समाज के विकास के लिए कार्य कर रही हैं। उनके बारे में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
आज के समय में भी कई व्यक्ति और संस्थाएँ समाज की भलाई के लिए कार्य कर रही हैं।
(क) स्त्री-शिक्षा
“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ (NGOs) ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को पढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही हैं।
(ख) पर्यावरण संरक्षण
कई संस्थाएँ पेड़ लगाकर, जल संरक्षण का संदेश देकर और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाकर पर्यावरण की रक्षा कर रही हैं। स्वच्छ भारत अभियान और वन महोत्सव जैसे कार्यक्रम भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
(ग) दिव्यांगजनों के लिए कार्य
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग तथा कई सामाजिक संस्थाएँ दिव्यांग लोगों को शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और समान अवसर उपलब्ध कराने का कार्य कर रही हैं।
(घ) सामाजिक समानता
कई स्वयंसेवी संस्थाएँ गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराती हैं। वे समाज में समानता और मानवता की भावना को बढ़ावा देती हैं।
3. यदि आपको समाज-सुधार का अवसर मिले तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
यदि मुझे समाज-सुधार करने का अवसर मिले, तो मैं निम्नलिखित कार्य करना चाहूँगा—
1. शिक्षा का प्रसार
मैं गरीब और जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा तथा पढ़ाई की आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास करूँगा।
2. स्त्री-पुरुष समानता
मैं लोगों को जागरूक करूँगा कि लड़का और लड़की दोनों समान हैं और दोनों को शिक्षा तथा आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
3. पर्यावरण संरक्षण
मैं अधिक से अधिक पेड़ लगाने, प्लास्टिक का कम उपयोग करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित करूँगा।
4. सामाजिक एकता
मैं जाति, धर्म और भाषा के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करने तथा सभी लोगों में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना विकसित करने का प्रयास करूँगा।
5. स्वच्छता और जागरूकता
मैं अपने आसपास सफाई रखने, जल की बचत करने और लोगों को स्वास्थ्य तथा स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास करूँगा।
3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
उत्तर:
यदि मुझे समाज-सुधार करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का प्रयास करूँगा। मेरा मानना है कि शिक्षा से ही समाज का सही विकास संभव है। मैं गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहायता करूँगा और लोगों को शिक्षा का महत्व समझाऊँगा।
इसके साथ ही मैं स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ावा दूँगा, ताकि लड़कियों को भी लड़कों के समान अवसर मिल सकें। मैं पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने, प्लास्टिक का कम उपयोग करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करूँगा।
मैं समाज में जाति, धर्म और ऊँच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने तथा सभी लोगों में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना विकसित करने का प्रयास करूँगा। मेरा विश्वास है कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी समाज में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। उत्तरः भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन के तीन महत्वपूर्ण पक्षों-नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक का संतुलन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
उत्तर:
भारतीय ज्ञान परंपरा में नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया है।
नैतिक जीवन हमें सत्य, ईमानदारी, दया और सदाचार का पालन करना सिखाता है।
आध्यात्मिक जीवन हमें आत्मचिंतन, शांति, संयम और ईश्वर के प्रति आस्था की प्रेरणा देता है।
व्यावहारिक जीवन हमें परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से पालन करना सिखाता है।
जब मनुष्य इन तीनों पक्षों में संतुलन बनाकर जीवन जीता है, तो वह स्वयं भी सुखी रहता है और समाज के विकास में भी अपना योगदान देता है। इसलिए भारतीय ज्ञान साहित्य हमें आदर्श और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
सृजन
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है।
लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती है तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है। आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी “आम के आम गुठलियों के दाम।” अब आप इस लोकोक्ति और “जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास” विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए। आम के आम, गुठलियों के दाम — जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास”आम के आम, गुठलियों के दाम” लोकोक्ति का अर्थ है—एक काम से दो या दो से अधिक लाभ प्राप्त होना।जैविक खाद बनाना इस लोकोक्ति का सबसे अच्छा उदाहरण है। घर से निकलने वाले फल और सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते तथा रसोई का जैविक कचरा फेंकने के बजाय उनसे खाद बनाई जा सकती है। इससे एक ओर कचरा कम होता है, तो दूसरी ओर पौधों के लिए उत्तम प्राकृतिक खाद भी तैयार हो जाती है।जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण भी स्वच्छ रहता है। इस प्रकार एक ही प्रयास से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और अच्छी खेती—तीनों का लाभ मिलता है। इसलिए जैविक खाद बनाना वास्तव में “आम के आम, गुठलियों के दाम” वाली कहावत को सार्थक करता है। - “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।”
आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न होता है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
दिनांक: 7 जुलाई 2026
दिन: मंगलवार
प्रिय डायरी,
आज मुझे एक पुरानी घटना याद आ गई। पहले मुझे लगता था कि हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य बहुत सख्त स्वभाव के हैं। उन्हें देखकर मैं उनसे बात करने से भी डरता था। मुझे लगता था कि वे हमेशा डाँटते होंगे।
लेकिन एक दिन मुझे उनसे अपनी एक समस्या बतानी पड़ी। उन्होंने मेरी बात ध्यान से सुनी, मुझे समझाया और मेरी पूरी सहायता की। उस दिन मुझे महसूस हुआ कि वे केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वे बहुत दयालु, सहयोगी और विद्यार्थियों की भलाई चाहने वाले हैं।
इस अनुभव से मैंने सीखा कि किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में केवल दूर से देखकर राय नहीं बनानी चाहिए। वास्तविकता का पता तभी चलता है, जब हम उसे निकट से समझते और अनुभव करते हैं।
– आपका मित्र
भाषा से संवाद
समास
“मुझे उन दोनों को निबंध-रचना का रहस्य समझाना पड़ेगा”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द को ध्यानपूर्वक पढ़िए। यह दो पदों ‘निबंध’ और ‘रचना’ के मेल से बना है, जिसका अर्थ है- निबंध की रचना।
उत्तरः समास की परिभाषाः समास का अर्थ है संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। जैसे गंगा जल गंगाजल ।
समास के छः प्रमुख भेदः
- तत्पुरुष समास – इसमें उत्तरपद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच में आने वाले परसर्गों (का, से, पर आदि) का लोप हो जाता है। जैसे रसोईघर = रसोई के लिए घर।
- कर्मधारय समास – इसमें पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है। जैसे-नीलकमल नील कमल नीले रंग का कमल।
- द्विगु समास- इसमें पूर्वपद संख्यावाची शब्द होता है और यह समूहवाची होता है। जैसे तिरंगा तीन रंगों का समाहार।
- बहुव्रीहि समास – इसमें दोनों पद गौण होते हैं और ये मिलकर किसी अन्य पद के विषय में संकेत करते हैं। जैसे पीतांबर पीला है अंबर (वस्त्र) जिसका अर्थात कृष्ण/विष्णु।
- द्वंद्व समास इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और जोड़ने वाले अव्यय का लोप हो जाता है। जैसे भाई-बहन भाई और बहन।
- अव्ययीभाव समास इसमें पूर्वपद अव्यय होता है। जैसे यथाशक्ति शक्ति के अनुसार।

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